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पुस्तक समीक्षा
हिंदी पत्रकारिता का स्वरुप’ यह पुस्तक डॉ. गोविन्द प्रसाद और अनुपम पाण्डेय द्वारा लिखी गई है. डॉ. गोविन्द डबल एम.ए, पी.एच.डी की है और वे अवध विश्वविध्यालय में वारिश रीडर के पद पर कार्यरत है और अनुपम पाण्डेय एम.ए और पि.एच.डी की है. इस पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता और आधुनिक तकनिकी का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है. पुस्तक में कुल 10 अध्याय है. अध्याय निम्न प्रकार के है। पत्रकारिता : विविध विधाए, भारतीय पत्रकारिता का इतिहास, हिंदी पत्रकारिता का‘ विकास, हिंदी पत्रकारिता तथा मीडिया लेखन की विविध विधाएं, हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार,संपादक एवं संवादातासंवादाता के कर्त्तव्य,हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला,सहिंदी पत्रकारिता तथा साक्षात्कार कौशल,हिंदी पत्रकारिता तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट।
सबसे पहले अध्याय ‘ पत्रकारिता : विविध विधाएं ‘ में पत्रकारिता की अवधारना, भारतीय पत्रकारिता का स्वरुप,, पत्रकारिता के मानदण्ड आदि के बारे में चर्चा की गई है. अध्याय 3 ‘ हिंदी पत्रकारिता का विकास ‘ में हिंदी पत्र करीता के उद्ध्भव से लेकर अभी तक के विकास की यात्रा को बताया गया है. अध्याय 5 हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार, संपादक, एवं संवादाता ‘ में पत्रकार – अवधारणा, कार्य, दायित्व; संपादक – अवधारणा, कार्य , दायित्व ; अम्पदक- अवधारणा, रूप, गुण, आदि को विस्तार से बताया है. अध्याय 7 ‘ हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला ‘ में संपादक के कार्य, संपादक का महत्व , संपादक और संवादाता में संबंध, समाचार संपादन, समाचार स्वरुप, फीचर , आदि पर चर्चा हुई है. अध्याय 10 ‘ हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट ‘ में हिंदी पत्रकारिता को इंटरनेट से मी लाभ, संबंध, कंप्यूटर नेटवर्क, इंटरनेट का इतिहास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय पत्रकारिता के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट कर वर्त्तमान स्वरुप को स्पष्ट किया गया है. सहज सुबोध भाषा शैली तथा तार्किक विश्लेषण में लिखी यह पुस्तक सभी के लिए उपयोगी है. यह पुस्तक 287 पृष्ठों की और डिस्कवरी पब्लिकेशन हाउस , नयी दिल्ली से 2007 में छापी है.
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