Wednesday, 31 July 2019

टेलीविजन की भाषा- बर्णवाल चंद्र हरिश

टेलिविजन  की भाषा पर प्रकाश डालती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा  
'टेलीविज़न की भाषा' यह पुस्तक हरिश चंद्र बर्णवाल ने  लिखी है। हरिश चंद्र बर्णवाल का जन्म पश्चिम बंगाल के आसनसोल  में हुआ, शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्लामिया से की है। वह IBN7 समाचार न्यूज़ चैनल में एसोसिएट एक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरथ थे। उन्होंने अपने टेलीविज़न में हुए अनुभव के आधार पर यह पुस्तक लिखी है। इसमें टेलीविज़न की भाषा पर जोर दिया है। पहले अध्याय में ही वह दृश्य और श्रव्य को एक समान महत्व दिया है। वह कहते है कि ' भाषा टेलीविज़न में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। अध्याय 2 से 5 तक में भाषा के उपयोग पर जोर दिया गया है। एक अध्याय में उन्होंने एंकर की भाषा और उसकी भूमिका को विस्तार  से बताया है।  पृष्ठ 71 पर हिंदी और अंग्रेजी में ताल मेल बैठाने पर चर्चा किया गया है आगे के कुछ पृष्ठों में।  टेलीविजन और भाषा के संबंद्ध को पृष्ठ 182 से ही बताना शुरू किया है। भाषा का सही तरीके से और सही रूप में इस्तमाल  करना  है। अगर शब्द थोड़ा सा भी इधर से उधर हुआ तोह अर्थ का अनर्थ  हो जाएगा। पृष्ठ 184 से 205 तक  समाचार में मोहवारे और लोकोवितयो का इस्तेमाल  कैसे किया जाए ? यह बताया है । हिंदी के साथ सौतेला व्यवहार क्यों ? इस अध्याय में वह हिंदी भाषा के उपयोग का को विस्तार देने की बात कर रहे है एवं अपने प्रश्न का उत्तर भी स्वयं देते है। यह पूरी पुस्तक टेलीविज़न में भाषा का महत्व व स्थान पर केंद्रीत है। हर प्रकार की जानकारी भाषा से जुड़ी मिलेगी । यह पुस्तक की प्रशंसा उनके मित्र राजदीप सरदेसाई जो अनेक चैनेल में कार्यरथ रहे ने भी की है। यह पुस्तक 235 पृष्ठों की , जिसका मूल्य 350 रुपये है। यह पुस्तक के दो संस्करण छापे राधाकृष्ण पिब्लिकेशन नई दिल्ली ।

Tuesday, 30 July 2019

कीबोर्ड पर बोल्ड लेटर F और J


कीबोर्ड 
कीबोर्ड पर अक्षर f और j bump है क्योंकि यह उंगलियों को ठीक से रखने में मदद करता है। यह कीबोर्ड की ओर देखे बिना टाइपिंग को आसान और तेज बनाता है। इस प्रकार के कीबोर्ड का आविष्कार 2002 में किया गया था। इस प्रकार के कीबोर्ड का आविष्कार सभी समय के लिए सबसे अच्छा था।

वेब पत्रकारिता- माथुर श्याम

वेब पत्रकारिता की दुनिया को उजागर करती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
इंटरनेट के इस दुनिया में पत्रकारिता ने अपने आपको नए रूप में प्रस्तूत किया है। इसी को आधार बनाके श्याम माथुर ने एक पुस्तक लिखी "वेब पत्रकारिता" के नाम से । मीडिया को तेजी से बदलती दुनिया में वेब पत्रकारिता द्वारा सभी जानकारी एक ही जगह मिल रही है । इस पर आधारित यह पुस्तक हमे इंटरनेट और मीडिया का संबंध  बता रही है । इस पुस्तक में 11 अध्याय हैं।   पहला अध्याय साइबर स्पेस  में इंटरनेट का इतिहास  और उसके विकास के बारे में बताया गया है। वर्ल्ड वाइड वेब  के निर्माण के  और वह किसे विकसित हुआ इस पर आधारित है, यह अध्याय । इस  में बिल गेट्स के योदन को भी बताया  गया है ।  अध्याय चार और में इंटरनेट की दुनिया में समाचार लेखन  और लेखन  में उपयोग होने वाले उपकारण को विस्तार दिया है।  अध्याय पाँच में वेब में संपादन और संचार डिज़ाइन निर्माण करने की प्रक्रिया बताई गई है । ब्लॉग के सामान्य जानकारी और ब्लॉग के प्रकार  बताये गए है अध्याय छे में। अध्याय आठ में साइबर अपराध  के नाम से है । जिसमे इंटरनेट पर अपराध का इतिहास और  कांफिकर, साइबर सुरक्षा, सुरक्षित ई- मेल भेजने वाले सॉफ्टवेयर आदि के बारे में बताया गया है। हिंदी को इंटरनेट जगत में स्थान  दिया गया जिससे हिंदी का विस्तार हुआ । इंटरनेट में नए शब्दों की पूर्ण रूप से समझाया है। इसमें इंटरनेट से जुड़े नए शब्दों को व्याख्या सहित बताया है । इसमें  प्रोग्रामिंग, कंप्यूटर वायरस, हैकर, एचटीएमएल आदि जैसे शब्दों को बताया है यह पुस्तक  128 पृष्ठों का है, पुस्तक  राजस्थान के प्रसिद्ध हिंदी ग्रंथ अकादमी , जयपुर से 2010 में छपी है । यह पुस्तक पूरी इंटरनेट की दुनिया की पूरी जानकारी दी है । इसमें लेखक ने भाषा बहुत सरल सी इस्तेमाल किया है । वेब की दुनिया को समझने के लिए यह  सरल पुस्तक। 

Monday, 29 July 2019

अलोवेरा के फायदे

 आलोवेरा 
अलोवेरा इस्तेमाल निम्न प्रकार के फायदे होते है
1.अलोएवेरा से वजन कम करने में मदतगार है।
2.अलोवेरा के सेवन से प्रतिरोध क्षमता बढ़ाता है।
3.एलोवेरा का जूस पीने से पेट संबंधित परेशानुयों से आराम मिलता है।
4.एलोवेरा जोड़ो के दर्द में काफी फायदेमंद है।
स्वस्थ शरीर के अलवेरा काफी मदतगार है।
5. फेस पैक के रूप में एलोवेरा उपयोगी है।
6. बालो को बढ़ने में बढ़ने में एलोवेरा मार्फत करता है ।

पत्रकारिता में संपादन का महत्व- अवस्थी प्रकाश ज्ञानेश

संपादक का महत्व बताती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
प्रस्तुत पुस्तक 'पत्रकारिता में संपादक का महत्व' ज्ञानेश प्रकाश अवस्थी द्वारा लिखी गई है। वह कहते है कि " संपादक किसी भी पत्र की आत्मा को प्रदर्शित करता है"। इसका यह अर्थ है कि संपादक के बिना कोई भी समाचार का कोई अस्तित्व नहीं है। इस पुस्तक में कुल 15 अध्याय हैं। सबसे पहले अध्याय में ही लेखक पत्रकारिता से हमे परिचित कराता है, समाचार और संपादक के बीच संबंध को बताता है। समाचार का सज्जा तैयार आवश्यक बिन्दुयों को हमारे समक्ष  अध्याय दो में रखता है। अध्याय चार में लेखक संपादक का महत्व बताते हैं और कहते है कि "संपादक का स्थान समाचार पत्र में श्रेष्ठ होता है"। वह  अध्याय छे में योगल किष्पर शुक्ल, हरिश्चजन्द्र भारतेंदु  जौसे प्रमुख पत्रकारों के बारे में विस्तार से बताते हैं। अध्याय  आठ से दस तक संपादक से उपसंपादक के कार्य, विशेषता आदि जैसे बिंदू पर लिखा गया है।  इस पुस्तकके अध्याय 11 में वह विभिन्न समाचार समितियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आखरी अध्याय में पत्रकार के कठिनायों और समस्या को बताते हुए इसस पुस्तक को समाप्त करते हैं।  यह पुस्तक संपादक के महत्व को समझने के लिए बहोत    अच्छी है।भाषा सरल है। लेख शैली ठीक - ठाक है। यह पुस्तक 255 पृष्ठों की है, इसकी कीमत 550 रूपये है। पुस्तक ओमेगा पब्लिकेशन, नई दिल्ली  से छपी है। 2010 का संस्करण है।

Saturday, 27 July 2019

भारत में जनसंचार- कुमार.जे. केवल

पुस्तक समीक्षा 
पत्रकारिता की विभिन्न विधाएं यह पुस्तक केवल जे कुमार द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक में पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं को नए सिरे से, नए रूप में, आधुनिकता के अनुरूप परिभाषित करने का प्रयास लेख़क द्वारा किया गया है। यह पुस्तक लेखक  ने कुलदीप और मीनाक्षी को समर्पित किया है। इस पुस्तक में कुल 8 अध्याय हैं। समाचार, रिपोर्टिंग, साक्षात्कार, रेडियो पत्रकारिता जैसे मुद्दों पर आधारित है। सबसे पहले अध्याय में  समाचार की अवधारणा दी है। समाचार की बात कर रहे है तो रिपोर्टिंग इस पर दूसरा अध्याय आधारित है। रिपोर्टर के गुण, विशेषताएं, कार्य आदि जैसे विषयों पर इस अध्याय पर बात की गई है। रेडियो पत्रकारिता पर भी चौथा अध्याय पूर्ण रूप से समर्पित है, इसमें संवाद लेखन, समाचार की विशेषताओं से लेकर उसे उसके तत्त्व बताया गया है। अध्याय छह में फ़ोटो पायरकरित से जुड़ी जानकारी दी गई है। फ़ोटो पत्रकारिता के छोटे से छोटे पहलू को बताया गया है। खीजी पत्रकारिता को भी इस पुस्तक में एक अध्याय के रूप में शामिल किया है, इसमें संवादाता और संवाद लेखन जैसी बातों को भी बताया गया है। इस पुस्तक में एक अध्याय ऐसा भी जिसमें व्यंग कैसे लिखते हैं यह बताया गया है। 194  पृष्ठों की यह पुस्तक पत्रकारिता के हर विधयों को छू रहा है । इसकी लेखन शैली बहुत अच्छी है। शब्द कठिन नही है आम  आदमी इससे समझ सकता है। 2006 में राधाकृष्ण पब्लिकेशन, नई दिल्ली से छपी  पुस्तक  की किमत 350 रुपये है।

Friday, 26 July 2019

पत्रकारिता की विभिन्न विधाएं- सिंह निशांत

           पत्रकारिता के विधायों को बतलाती पुस्तक                                     

                                                     
पुस्तक समीक्षा
पत्रकारिता की विभिन्न विधाएं यह पुस्तक डॉ. निशांत सिंह द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक में पत्रकारिता की विभिन्न विधाओं को नए सिरे से, नए रूप में, आधुनिकता के अनुरूप परिभाषित करने का प्रयास लेख़क द्वारा किया गया है। यह पुस्तक लेखक  ने कुलदीप और मीनाक्षी को समर्पित किया है। इस पुस्तक में कुल 8 अध्याय हैं। समाचार, रिपोर्टिंग, साक्षात्कार, रेडियो पत्रकारिता जैसे मुद्दों पर आधारित है। सबसे पहले अध्याय में  समाचार की अवधारणा दी है। समाचार की बात कर रहे है तो रिपोर्टिंग इस पर दूसरा अध्याय आधारित है। रिपोर्टर के गुण, विशेषताएं, कार्य आदि जैसे विषयों पर इस अध्याय पर बात की गई है। रेडियो पत्रकारिता पर भी चौथा अध्याय पूर्ण रूप से समर्पित है, इसमें संवाद लेखन, समाचार की विशेषताओं से लेकर उसे उसके तत्त्व बताया गया है । अध्याय छह में फ़ोटो पायरकरित से जुड़ी जानकारी दी गई है। फ़ोटो पत्रकारिता के छोटे से छोटे पहलू को बताया गया है। खीजी पत्रकारिता को भी इस पुस्तक में एक अध्याय के रूप में शामिल किया है, इसमें संवादाता और संवाद लेखन जैसी बातों को भी बताया गया है। इस पुस्तक में एक अध्याय ऐसा भी जिसमें व्यंग कैसे लिखते हैं यह बताया गया है। 194  पृष्ठों की यह पुस्तक पत्रकारिता के हर विधयों को छू रहा है। इसकी लेखन शैली बहुत अच्छी है। शब्द कठिन नही है आम  आदमी इससे समझ सकता है। 2006 में राधाकृष्ण पब्लिकेशन, नई दिल्ली से छपी  पुस्तक  की किमत 350 रुपये है।

Thursday, 25 July 2019

इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्र का इतिहास


इंडियन एक्सप्रेस समाचार पत्र
इंडियन एक्सप्रेस एक अंग्रेजी भाषा का भारतीय दैनिक समाचार पत्र है। इसकी शुरुआत चेन्नई में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर पी। वरदराजुलु ने की थी, आर्थिक संकट के कारण उन्होंने एक स्वतंत्र समाचार पत्रिका, द नेशनल प्रेस एजेंसी, 1933 के संस्थापक स्वामीनाथन सदानंद को अखबार कंपनी को बेच दिया, उन्होंने कंपनी के अपने हिस्से का एक हिस्सा रामनाथ को बेच दिया। गोयनका। 1935 में वह वर्ष था जिसमें अदालत में कंपनी के स्वामित्व के लिए लड़ाई हुई थी और इस लड़ाई में रामनाथ गोयनका की जीत हुई थी। उस समय रामनाथ गोयनका मालिक थे और उन्होंने कंपनी का विस्तार करना शुरू कर दिया था। उनकी हार्डवर्क से कंपनी को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा दर्जा हासिल हुआ। उनकी कंपनी को आगे दो भागों में विभाजित किया गया। भारत के सभी उत्तर भाग में इंडियन एक्सप्रेस और भारत के दक्षिण भाग में अखबार का नाम एक्सप्रेस मदुरै की बिक्री होती है।

जनसंचार के सिद्धान्त और अनुप्रयोग- राजगढ़िया विष्णु

पुस्तक समीक्षा 

'जनसंचार के सिद्धांत और अनुप्रयोग' यह पुस्तक विष्णु राजगढ़िया द्वारा लिखी गई है। जनसंचार से जुड़े विविध पहलुयों पर केंद्रित है। यह पुस्तक शिक्षा के क्षेत्र में संचार से जुड़े अध्ययन को  बढ़ावा देने में यह  बहुत कारगर है। पुस्तक में कुल 8 अध्याय हैं। पहले अध्याय में संचार के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रखी गयी है। दूसरे अध्याय में संचार के प्रकार बताएं गए हैं। तीसरा अध्यायमे संचार थ्योरी एवं मॉडल बताए गए हैं। मॉडल जिसे लॉसवेल का संचार मॉडल, शेनॉन एवं बीवर मॉडल आदि प्रकार के मॉडल बताया गया है। पाँचवे अध्याय में स्परेल ऑफ साइलेंस,अजेंडा सेटिंग आदि जिसे संचार सिद्धांत पर आधारित है। सबसे प्रमुख सिद्धान्त च्छ्ठे अध्याय में बताया गया है। श्रोता, संचार के अंतर्वस्तु आदि के बारे में सातवा अध्याय में दिया है। यह पुस्तक कुल 151 पृष्ठों की है । इसमें संचार के सभी सिधान्तो पर चर्चा की गई हैं। इस पुस्तक की कीमत 95 रुपये है। यह राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक जनसंचार के सिद्धांत को समझने के लिए बहुत अच्छी है। ये पुस्तक सभी सिद्धांतो और जनसंचार के पहलु को अच्छे से प्रस्तुत कर रही ही है।

Wednesday, 24 July 2019

तुलसी (तुलसी) के पौधे का महत्व

तुलसी का पौधा
हिन्दू धर्म में तुलसी को घर में रखने या घर में रोपने के लिए एक शुभ पौधा है। इसे देवी लक्ष्मी के रूप में माना जाता है और इस तरह से रखा जाता है जहां सूर्य का प्रकाश पौधे पर सीधा पड़ता है क्योंकि सूर्य को भगवान विष्णु के रूप में माना जाता है, दोनों एक दूसरे के करीब हैं। तुलसी के पवित्र पौधे को इसलिए शादी जैसे धार्मिक समारोहों में इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप तुलसी के पौधे का सम्मान कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप सभी देवताओं का सम्मान करते हैं। इसे हिंदू पौराणिक कथाओं में बुराई के वार्ड के रूप में भी माना जाता है। कुछ लोग इसके सेवन को शरीर के लिए अच्छा मानते हैं।.

वर्धा रेलवे स्टेशन की नई इमारत

नई इमारत यह वर्धा शहर के रेलवे स्टेशन की नई इमारत है। इसे बनने में 2 साल का समय लगा है। इस इमारत में 8 काउंटर हैं जिसमे 4 आरक्षित काउंट...