Patrakarita Shiksha mein Patrakarita ko samjhne ke media ke har pahluko samjhna jaruri hai . Patrakarita kosamjhne ke liye vibhin prakar ke book yeh batayega
Monday, 14 October 2019
गणेश चतुर्थी पर विश्वविद्यालय में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई
गणेश चतुर्थी
इस साल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई। गणेश चतुर्थी के अवसर पर। इसमें कुलपति सर का बहुत सहयोग रहा। उन्होंने यह त्योहार को धूम-धाम से मनाने की अनुमति दी। इस वर्ष गणेश चतुर्थी बहुत अच्छे से मनाया गया। आंखरी दिन पूरे विश्वविद्यालय के लिए महाभोज की व्यवस्था भी की गई थी।
बाबूराव विष्णु पराड़कर मीडिया लैब
बाबूराव विष्णु पराड़कर मीडिया लैब
बाबूराव विष्णु पराड़कर मीडिया लैब यह जनसंचार विभाग का लैब है। जिसमें एक स्टूडियो, रिकॉर्डिंग रूम, एडिटिंग रूम और कंप्यूटर लैब है। यह सभी मीडिया के विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाएं है। इसमें सब विद्यार्थी अपने आपको एक मीडिया विद्यार्थी के रूप में तैयार करने के तैयार उपयोग करते हैं।जनसंपर्क सिद्धान्त और व्यवहार- डॉ.तिवारी अर्जुन, तिवारी विमलेश
जनसम्पर्क के सिधान्त पर प्रकाश डालती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'जनसंपर्क सिद्धान्त और व्यवहार' यह पुस्तक डॉ.अर्जुन तिवारी और विमलेश तिवारी द्वारा लिखी गई है। डॉ.अर्जुन तिवारी ने एम.ए, पी.एच.डी की है और विमलेश तिवारी ने एम.ए,एम.जे.एम.सी की है। मीडिया की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विधा जनसंपर्क है जिसके सिद्धान्त और व्यवहार पक्ष से सभी को परिचित होना चाहिए। प्रस्तुत पुस्तक में जनसंपर्क के सिद्धांत और व्यहारिक पक्ष पर बात की गई है। प्रस्तुत पुस्तक में 38 अध्याय हैं। यह अध्याय जनसंपर्क की अवधारणा, तत्व, सिद्धांत एवं कार्य, विज्ञापन तथा जनसंपर्क, प्रबंधन एवं जनसंपर्क, इवेंट मैनेजमेंट और जनसंपर्क, जनसंपर्क अधिकारी, मार्केटिंग और पी.आर, गृहपत्रिका, जनसंपर्क प्रविधि, जनसंपर्क एजेंसी, जनसंपर्क शोध, जनसंपर्क की आचार-संहिता आदि जैसे विषयों पर आधारित है। यह पुस्तक जनसंपर्क के हर पहलू पर बात की गयीं है। कॉर्पोरेट जनसपंर्क और उसके आंच संहिता पर भी बात की गई है। यह पुस्तक जनसंपर्क क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी है। 331 पृष्ठों की यह पुस्तक 2007 में विश्वविद्यालय प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की कीमत 300 रुपये है।
Sunday, 13 October 2019
रेडियो प्रसारण की नयी तकनीक- डॉ. सिन्हा किशोर
रेडियो के प्रसारण तकनीक पर प्रकाश डालती पुस्तक
समीक्षा
'रेडियो प्रसारण की नयी तकनीक' यह पुस्तक डॉ.किशोर सिंह द्वारा लिखी गई है। लेखक ने एम.ए और पी.एच.डी की है।रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में कई दृष्टि से अनोखा, अनुपम और चुनौतीपूर्ण है।इसके जरिये भोक्ता(प्रसारक) और उपभोक्ता(श्रोता) की दूरी मिट जाती है। प्रस्तुत पुस्तक में 6 अध्याय हैं। यह अध्याय रेडियो की प्रसारण परंपरा और विकास,रेडियो में लेखन का सिद्धांत, रेडियो प्रसारण की विशिष्ट विधाएं,विविध आयाम, और रेडियो प्रसारण की तकनीक आदि पर आधारित है। पहला अध्याय में रेडियो प्रसारण परंपरा और विकास पर चर्चा की गई, दूसरे अध्याय के लिए किसे लिखे इस पर चर्चा हुई, तीसरे में रेडियो प्रसारणकी विशिष्ट विधाओं पर प्रकाश डाला गया है, चौथे में रेडियो के विविध कार्यक्रमों पर, पांचवे में प्रसिद्ध एफ.एम रेडियो बारे में विस्तृत चर्चा की गई और आखरी में प्रसारण तकनीक पर बात की गई है। 191पृष्ठों की यह पुस्तक प्रकाशन संस्थान से 2010 में प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की कीमत 300 रुपयें हैं।
Friday, 11 October 2019
Tuesday, 8 October 2019
संचार और मीडिया शोध- डॉ. गुप्ता विनीता
मीडिया में शोध कैसे किया जाए यह बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'संचार और मीडिया शोध' यह पुस्तक डॉ.विनीत गुप्ता द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक में शोध के विभिन्न आयामों पर विस्तार से बात की गयी है। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 11 अध्याय हैं। यह अध्याय निम्न विषयों पर आधारित हैं-शोध:अर्थ,अवधारणा और उद्देश्य,शोध-दृष्टि और विधियां,शोध उपकरण,आँकड़े,नमूना-विधि,शोध-प्रक्रिया,शोध में सांख्यकी,मीडिया-प्रभाव मापना,मीडिया शोध संस्थाएं,मीडिया शोध और पत्रकारिता,मीडिया शोध और नैतिकता। इस पुस्तक में मीडिया शोध से जुड़े हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की गई है।यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए बहोत जड़ उपयोगी है। यह शोधार्थियों को शोध में दिशा दिखाने का काम करेगी। 139 पृष्ठों की यह पुस्तक वाणी प्रकाशन से 2015 में प्रकाशित हुई है।प्रस्तुत पुस्तक की किमत 200 रुपये हैं।
पंचधारा बांध, रिधोरा गाँव, वर्धा, महाराष्ट्र
पंचधारा बांध
पंचधारा बांध महाराष्ट्र के वर्धा जिले के सेलू तालुका में रिधोरा गाँव का एक बाँध है। यह बाँध विदर्भ क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण पानी से भरा हुआ है। इस इलाके के स्थानीय लोग उस पानी का आनंद ले रहे हैं जो बाँध के ऊपर गिर रहा है। इससे देख कर लग रहाई है की वर्धा में इस साल अच्छीबारिश हुई है।
Friday, 4 October 2019
प्रेस विधि- डॉ.त्रिखा नंदकिशोर
प्रेस के लिए नियम बताती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'प्रेस विधि' यह पुस्तक डॉ. नंदकिशोर त्रिखा द्वारा लिखी गई है। लेखक ने बी.ए,एम.ए,पी.एच.डी की है।प्रस्तुत पुस्तक में कुल 15 अध्याय हैं। यह अध्याय भारतीय संविधान और प्रेस, प्रेस और पुस्तक रेजिस्ट्रेशन अधिनियम 1867, शासकीय गुप्त अधिनियम 1923, मानहानि, न्यायालय की अवमानना, भारतीय दण्ड सहिंता 1860, प्रेस परिषद अधिनियम 1978, बाल अधिनियम आदि जैसे विषयों पर आधारित है। यह पुस्तक मीडिया जगत के सभी लोगों के लिए उपयोगी और विद्यार्थी के लिए मदतगार है। 326 पृष्ठों की यह पुस्तक विश्वविद्यालय प्रकाशन से 2004 में प्रकाशित हुई है।
मीडिया इंटरव्यू- पंकज विष्णु
इंटरव्यू के बारे में बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'मीडिया इंटरव्यू' यह पुस्तक डॉ.विष्णु पंकज द्वारा लिखी है। लेखक शोधकर्ता,विचारक,समजसेवि हैं। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 5 अध्याय हैं। इन अध्यायों में इंटरव्यू के स्वरूप, प्रकार, विकास, हिंदी साहित्य का इतिहास, शोधग्रंथों में इंटरव्यू-विधा, इस विधा में महिलाओं के योगदान आदि पर चर्चा भी की गईं है।यह सब लेखक, पत्रकार,मीडियाकर्मी,इंटरव्यूकारों, आलोचोकों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी। 208 पृष्ठों की यह पुस्तक मंगलदीप पब्लिकेशन से 2004 में प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की कीमत 475 रुपये है।
Thursday, 3 October 2019
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं साइबर पत्रकारिता- कुमार राकेश
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं साइबर पत्रकारिता की जानकारी देती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं साइबर पत्रकारिता' यह पुस्तक राकेश कुमार द्वारा लिखी है। लेखक ने एम.ए इतिहास और पत्रकारिता एवं जनसंचार से डिप्लोमा किया है। प्रस्तुत पुस्तक में 19 अध्याय हैं। यह अध्याय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विभिन्न साधनों जैसे रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा के अतिरिक्त इंटरनेट में जैसे साइबर मीडिया का उद्भव, विकास एवं उनसे जुड़ी तकनीकी बारीकियों एवं शब्दावली आदि पर आधारित है। यह पुस्तक उन छात्रों के लिए अच्छी है जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपना करियर बनाना चाहते है और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रति जिज्ञासा रखने वालों पाठकों के लिए उपयोगी है। 190 पृष्ठों की यह पुस्तक श्री नटराज प्रकाशन से 2009 में प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की किमत 350 रुपये है।
Monday, 30 September 2019
पत्रकारिता: एक परिचय- श्रीवास्तव कुमार संदीप
पत्रकारिता से परिचित कराती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'पत्रकारिता: एक परिचय' यह पुस्तक संदीप कुमार श्रीवास्तव द्वारा लिखी गयी है। लेखक ने एम.ए समाजशास्त्र और पी.जी.जे.एम.सी इग्नू से किया है। वर्तमान में चैनल 51 के लिए अवैतानिक संवादाता के रूप में कार्य किया। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 19 अध्याय है। जिसमें शुरुवात के अध्यायों में पत्रकारिता, समाचार लेखन, रिपोर्टिंग, खोजी पत्रकारिता, फ़ोटो पत्रकारिता, भारत में प्रेस का इतिहास आदि जैसे मुद्दों पर विस्तार पर चर्चा की गई है। अंतिम के अध्यायों में आजादी के बाद भारत में प्रेस, समाचार लेखन,फ़ीचर का स्वरूप,भारत में प्रेस परिषद जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। प्रस्तुत पुस्तक में पत्रकारिता विभिन्न विध्याओं पर विस्तार से चर्चा की गयी जिससे नए विद्यार्थियों के लिए को पत्रकारिता क्या है इससे रुब-रूह करती है।यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए पत्रकारिता को सरल तरीके से समझने के लोए अच्छी है।184 पृष्ठों की यह पुस्तक जयभारती प्रकाशन, इलाहाबाद से 2006 में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक की किमत 180 रुपये है।
पत्रकारिता एवं संपादन कला- वर्मा नेहा
पत्रकारिता एवं सम्पादन कला को बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'पत्रकारिता एवं संपादन कला' यह पुस्तक नेहा वर्मा द्वारा लिखी गई है। लेखक ने अपनी शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 7 अध्याय हैं। यह अध्याय निम्न है- आधुनिक पत्रकारिता, मीडिया लेखन, मीडिया शोध, संपादन कला, मुद्रण कला, साक्षात्कार कला, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और विज्ञापन विभिन्न विषयों पर आधारित हौ। इसमें पत्रकारिता से जुड़े विविध क्षेत्रों के साथ-साथ संपादन कला के भी प्रमुख विधाओं का उल्लेख किया गया है। लेखक ने पत्रकारिता में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए यह पुस्तक लिखी है। 231 पृष्ठों की यह पुस्तक संजय प्रकाशन से 2007 में प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की किमत 500 रुपये है।
पत्रकारिता एवं संपादन कला- एन.सी.पंत
पत्रकारिता और सम्पादन को बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'पत्रकारिता एवं संपादन कला' यह पुस्तक एन.सी.पंत द्वारा लिखी गई है। लेखक ने अपनी शिक्षा कुमाऊ विश्वविद्यालय, नैनिताल से की और पत्रकारिता में रुचि के कारण उन्होंने ने अनेक पुस्तक लिखी। प्रस्तुत पुस्तक में 23 अध्याय हैं। इन अध्यायों में पत्रकारिता का संशिप्त इतिहास, पत्रकारिता के अर्थ एवं परिभाषा, पत्रकारिता एवं साहित्य, संपादक एवं सम्पादकीय विभाग, समवादता एवं उप-संपादक, समाचार संपादन, समाचार संपादन, समाचार समितियां, संपादन कला का स्वरूप, मुद्रण कला, फीचर लेखन, साक्षात्कार, जनसंपर्क, रेडियो एवं दूरदर्शन पत्रकारिता, संचार क्रांति , पत्रकारिता का सामाजिक दायित्व आदि जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गईं है। प्रस्तुत 262 पृष्ठों की यह पुस्तक राधा पब्लिकेशन से 2005 में प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक की किमत 450 रुपये है।
Monday, 16 September 2019
मीडिया शोध- डॉ.दयाल मनोज
मीडिया शोध पर प्रकाश डालती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'मीडिया शोध' यह पुस्तक डॉ.मनोज दयाल द्वारा लिखी गई है। लेखक वर्तमान में हिसार स्थित जंभेश्वर विश्वविद्यालय के संचार प्रबंधन में अध्यक्ष एवं मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन के पद पर कार्यरत है। मीडिया शोध एक आधुनिक विषय होने के कारण इस पर पुस्तक अत्यंत कम होने के कारण यह पुस्तक को लिखी गयी है। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 12 अध्याय हैं। जिसमें आरंभिक 5 अध्यायों में शोध की वस्तुनिष्ठता,पत्रकारिता से अंतरसंबंध एवं शोध समस्यों के बारे में विश्लेषण आदि के बारे में विस्तार से चर्चा हुई है। अंतिम 5 अध्यायों मे मीडियाकी पद्धतियां, प्रारचनाये, प्रणालियां, आकड़ें , प्रतिवेदन तथा माध्यमों पर उपयोगी सामग्री के बारे में बात की गई है। 252 पृष्ठों की यह पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी से 2010 में प्रकाशित हुई और इस पुस्तक की किमत 140 रुपयें हैं।
Monday, 9 September 2019
पत्रकारिता और समाज- कुमार संतोष
पत्रकारिता और समाज के संबंध को बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'पत्रकारिता और समाज' यह पुस्तक संतोष कुमार द्वारा लिखी गई है। लेखक ने एम.ए और बी.एड किया है, पत्रकारिता में रुचि के कारण इसे अपना क्षेत्र बनाया। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 15 अध्याय हैं। इन अध्यायों में पत्रकारिता और समाज: प्रस्तावना, पत्रकारिता,संविधान के दायरे में पत्रकारिता,संपादक के कार्य और आदर्श ,भारतीय पत्र और पत्रकारों का मूल्यांकन, प्रेस की स्वतंत्रता और मानव समाज, जनसंचार में फीचर का योगदान, पीत पत्रकारिता: एक सामाजिक अभिशाप आदि शीर्षकों के द्वारा विषय वस्तु को अत्यंत सरल ढंग से समझाया गया है। यह पुस्तक पत्रकारिता और समाज के बीच संबंध जानने के लिए उपयोगी है। 288 पृष्ठों कि यह पुस्तक ओमेगा पिब्लिकेशन से 2008 में प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक 650 रुपये की है।
पत्रकारिता का आविर्भाव- डॉ. अस्थाना मधु
पत्रकारिता को बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 'हिंदी पत्रकारिता का आविर्भाव' यह पुस्तक डॉ.मधुबाला अस्थाना ने लिखी है। लेखिका एम.ए और पी.एच.डी हिंदी विषय से किया है। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 7 अध्याय हैं। इन अध्यायों में हिंदी पत्रिकाओं का उद्भव, भारतेन्दु - पूर्व पत्र-पत्रिकाओं का विकास, हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में आलोच्यकाल का महत्व तथा इस विवेच्यकाल की पत्रकारिता में भाषा और साहित्य का विकास क्रम आदि जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई है।अतः कह सकते हैं कि इस पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्टभूमि पर प्रकाश डाला गया है। यह पुस्तक सभी विद्यार्थियों के लिए मदतगार साबित होगी। 175 पृष्ठों की यह पुस्तक सत्य प्रकाशन, नई दिल्ली से 2010 में प्रकाशित हुई है। प्रस्तुत पुस्तक की किमत 325 रुपयें हैं।
Saturday, 7 September 2019
प्रिंट मीडिया- सिद्धांत एवं व्यवहार- गौतम रूपचंद
प्रिंट मीडिया के बारे में विस्तार से बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'प्रिंट मीडिया: सिद्धांत एवं व्यवहार' यह पुस्तक रूपचंद गौतम द्वारा लिखी गयी है। रूपचंद गौतम की शिक्षा उत्तर प्रदेश से हुई है, उन्होंने संपादन और पुस्तक भी लिखी है। प्रस्तुत पुस्तक में मानव ज्ञान की वृद्धि करने वाला प्रिंट माध्यम के विविध आयाम पर चर्चा की गई है। पिश्ताक में कुल 18 अध्याय है। मुख्य अध्याय संपादन, आलेख रिपोर्टिंग, फ़ोटो, कार्टून, विज्ञापन, प्रूफ-पठन, पृष्ठ-सज्जा, एवं मुद्रण प्रिंट आदि हैं।'प्रिंट मीडिया से जुड़ी हर आयाम पर चर्चा की गयी है।यह कार्टून, विज्ञापन, आलेख आदि पर विस्तार से बताया गया है । यह पुस्तक प्रिंट मीडिया में रुचि रखने वाले विध्यार्थियों के लिए मदतगार साबित होफ़गी। यह पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालय द्वारा चलाएं जा रहे 'जनसंचार एवं पत्रकारिता' के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर विद्यार्थियों के लिए लिखी गई है। 192 पृष्ठों की यह पुस्तक श्री नटराजन प्रकाशन से 2008 में प्रकाशित हुई जिसकी कीमत 375 रुपये है।
Tuesday, 3 September 2019
पत्रकारिता का अवलोकन- एन.सी.पंत
पत्रकारिता का अवलोकन करती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
‘पत्रकारिता का अवलोकन’ यह पुस्तक एन.सी.पंतद्वारा लिखी गयी। लेखक ने अपनी शिक्षा कुमाऊ विश्वविद्यालय
,नैनीताल से प्राप्त की,पत्रकारिता से जुड़े अनेक पुस्तक प्रकाशित कर चुके हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में मुख्यतया पत्रकारिता के उद्देशों पर प्रकाश डाला गया। उसके
पश्चात पत्रकारिता के क्रमिक विकास और उसकी वर्त्तमान स्थितीऔर वर्त्तमान में
प्रकाशित होने वाले विभिन्न पत्र-पत्रिकाओ के बारे में अवगत कराया गया है। पुस्तक
में हिंदी पत्रकारिता से सम्बंधित अधिकतर पत्र-पत्रिकाओ का जिक्र करने का प्रयास
किया है। फिर भी अनेक पत्र एवं पत्रिकाओं में सूचना नहीं होने की आशंका है क्यों की दिन – प्रतिदिन प्रकाश में आ रही
है। प्रस्तुत पुस्तक में कुल 7 अध्याय । इसमें भारतीय पत्रकारिता एवं १८५७ का
राष्टट्रीय आन्दोलन,तिलाक्युगीन हिंदी
पत्रकारिता, पत्रकारिता में बंगभूमि की भूमिका बीसवी शताब्दी में हिंदी
पत्रकारिता, स्वतान्त्रवोतर हिंदी
पत्रकारिता , पत्रकारिता का मूल्याकन आदि पर विस्तार से चर्चा गई है । १६५ पृष्ठों
की यह पुस्तक राधा प्रक्लाशन से प्रकशित पुस्तक की कीमत २५० रुपये हैं ।
Sunday, 1 September 2019
वैद्यनाथ मिश्र- नागार्जुन की प्रतिमा
नागार्जुन
यह वैद्यनाथ मिश्र की प्रतिमा है, जिसे उनके कलम नाम नागार्जुन के नाम से जाना जाता है। नागार्जुन के नाम पर एक वीवीआईपी गेस्ट हाउस का नाम भी रखा गया है। हिंदी और मैथिली के कवि ने कई उपन्यास, लघु कथाएँ, साहित्यिक आत्मकथाएँ और यात्रा वृतांत भी लिखे हैं। इसलिए, उनका काम हिंदी में प्रसिद्ध था और उनके काम के लिए उन्हें सम्मान देने के लिए विश्वविद्यालय में मूर्तिस्थापित की गयी है।
Thursday, 29 August 2019
जनसंचार एवं पत्रकारिता- कुमारी शिप्रा
जनसंचार और पत्रकारिता के संबंध बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'जनसंचार एवं पत्रकारिता' यह पुस्तक कुमारी शिप्रा द्वारा लिखी गयी है। लेखिका ने एम.बी.ए तथा जनसंचार पत्रकारिता की डिग्री दिल्ली से प्राप्त की है। इस पुस्तक में जनसंचार पर विस्तृत चर्चा हुई है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय हैं। इन अध्यायों में जनसंचार का विकास, समाज, चुनौतियाँ, भारत में कम्प्यूटर तथा इंटरनेट भारतीय सिनेमा की भूमिका, समाचार संगठन एवं प्रचालन, विज्ञापन मीडिया, प्रेस कानून,नैतिकता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। यह पुस्तक जनसंचार को समझने के लिए अच्छी है लेकिन पत्रकारिता की जानकरी बहोत सीमित है। जो लोग पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में हैं उनके लिए यह पुस्तक मदतगार साबित होगी। 260 पृष्ठों की यह पुस्तक ओमेगा पिब्लिकेशन से 2008 में प्रकाशित है और इसका मूल्य 550 रुपये है।
Tuesday, 27 August 2019
जनसंचार माध्यम एवं पत्रकारिता- विजय शर्मा
पुस्तक समीक्षा
'जनसंचार माध्यम एवं पत्रकारिता' यह पुस्तक विजय शर्मा द्वारा लिखी गयी है। शर्मा जी ने सूचना प्रौधोगिकी में एम.ए,एम.फिल किया और वर्तमान समय में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय,नोएडा में सेवा दे रहे हैं।प्रस्तुत पुस्तक में जनसंचार के विभिन्न माध्यमों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।विज्ञापन का जनसंचार में क्या महत्व है इस पर भी प्रकाश डाला गया है।जनसंपर्क आज के युग में महत्व और पत्रकारिता इसमें क्या भूमिका निभा रही है कि भी विस्तृत व्याख्या की गई है। यह इशिका पब्लिकेशन हाउस ,जयपुर से प्रकाशित पुस्तक 208 पृष्ठों की 625 रुपये की है।पुस्यक मीडिया से जुड़े व्यक्तियों व विद्यार्थियों के लिए अच्छी है।
Monday, 19 August 2019
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का गांधी हिल
गांधी हिल
गांधी हिल महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पहाड़ी की चोटी पर एक बगीचा है। इस बगीचे में महात्मा गांधी, तीन बंदर, बकरी आदि की प्रतिमा है। यह बगीचा शहर के नागरिकों के लिए पर्यटन स्थल की तरह है।यह स्थान विश्वविद्यालय के छात्रों के चर्चा, समूह अध्ययन, अभिव्यक्ति आदि के लिए उपयोग करते हैं।
Sunday, 18 August 2019
प्रसारण तकनीकी- शर्मा विजय
प्रसारण तकनीक को बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'प्रसारण तकनीकी' यह पुस्तक 'विजय शर्मा' द्वारा लिखी गयी है। लेखक ने सूचना प्रौधोगिकी से एम.एस, एम.फिल किया है और वर्तमान समय में माखनलाल चतुरर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। इस पुस्तक में प्रसारण तकनीक को आधार बनाकर लिखा गया है । प्रस्तुत पुस्तक इन कुल 7 अध्याय हैं। यह अध्याय रेडियो प्रसारण तकनीक, टेलीविज़न प्रसारण तकनीकी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपयोग होने वाले प्रसारण तकनीकी, सीधा प्रसारण , आदि जैसे मुद्दों पर आधारित है । इस पूरी पुस्तक प्रसारण तकनिक और उसके उपकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई है । प्रस्तुत पुस्तक विज्ञापन से जुड़े लोग, मीडिया कर्मी, मीडिया से जुड़े विद्यार्थी,शोरधर्ती आदि जैसे लोगों के लिए बहोत उपयोगी है। यह पुस्तक इशिका पिब्लिकेशन से 2012 में प्रकाशित हुई है ।
प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने स्वतंत्र दिवस पर छात्रों प्रोत्साहित किया
प्रो.रजनीश कुमार शुक्ला
प्रो.रजनीश कुमार शुक्ला ने महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने राष्ट्र के लिए लड़े गए स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बताया। उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रेरित करना था और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना था क्योंकि छात्र राष्ट्र का भविष्य होते हैं।
Monday, 12 August 2019
पंडित मदन मोहन मालवीय भवन
पंडित मदन मोहन मालवीय भवन
वर्धा विश्वविद्यालय में स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय नामक दूर शिक्षा की एक इमारत है। इस भवन में हिंदी मेंसभीपाठ्यक्रम का अध्ययन किया जाता है क्योंकि पंडित मदन मोहन मालवीय एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने 1916 में शिक्षा को बढ़ावा दिया और अंतः 1916 में वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना की। इसलिए, उनके सम्मान में इस भवन का नाम रखा जा रहा है।
Sunday, 11 August 2019
विज्ञापन- महाजन अशोक
विज्ञापन की जानकारी देती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'विज्ञापन' यह पुस्तक अशोक महाजन द्वारा लिखी गयी है। अशोक महज ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन विज्ञापन व दृश्यश्रव्य प्रचार निदेशालय में अधिकारी के रूप में कार्य किया है। यह पुस्तक भारतीय पृष्ठभूमि में विज्ञापन के महत्व को बता रहे है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय है। यह अध्याय निमानुसार है :-
'विज्ञापन' यह पुस्तक अशोक महाजन द्वारा लिखी गयी है। अशोक महज ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन विज्ञापन व दृश्यश्रव्य प्रचार निदेशालय में अधिकारी के रूप में कार्य किया है। यह पुस्तक भारतीय पृष्ठभूमि में विज्ञापन के महत्व को बता रहे है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय है। यह अध्याय निमानुसार है :-
परिचय,परिभाषा, इतिहास, भारतीय विज्ञापनो व्यापार,मार्केटिंग, विज्ञापनों का वर्गीकरण, गवेषणा विज्ञापन , कानून और संहिताए, आलोचनाएं एवं विशेषताएं, विज्ञापन माध्यम, विज्ञापन एजेंसी, विज्ञापन बजट,विज्ञापन निर्माण,शेड्यूलिंग।
अध्याय 1 'परिचय' में विज्ञापन शब्द की उत्पत्ति, अर्थ को विस्तार से बताया है। अध्याय 2 'परिभाषा' में विज्ञापन की परिभाषा दी गयी है। अध्याय 3 'इतिहास' में विज्ञापन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताया है। अध्याय 4 'भारतीय विज्ञापन व्यापार' विज्ञापन को व्यापार के वृद्धि में सहाय किस प्रकार है इसपर विस्तार से बताया गया है। अध्याय 8 'विज्ञापन , कानून और संहिताएं' में विज्ञापन करते समय कुछ कानून और संहिताएं पर प्रकाश डाला गया है। अध्याय 10 'विज्ञापन माध्यम' में विज्ञापनों के लिए अलग - अलग माध्यमों पर विस्तार से चर्चा हुई है। अध्याय 12 'विज्ञापन बजट' अर्थात विज्ञापन बनाने में किन चीज़ों पर कितना खर्च आएगा इसपर चर्चा की गयी है। अध्याय 13 'विज्ञापन निर्माण' में विज्ञापन निर्माण प्रक्रिया पर विस्तार से बात हुई है।
विज्ञापन का इतिहास और व्यापार, विज्ञापनों का वर्गीकरण, विज्ञापन माध्यम, विज्ञापन बजट, विज्ञापन एजेंसी आदि विषयों पर लिखी गई यह पुस्तक जहाँ एक ओर जनसंपर्क और विपणन के क्षेत्र में हिंदी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के आवक्षकताओं को पूरा करेगी, वही दूसरे तरफ विज्ञापन - व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए एक गाइड का काम करेगी यह पुस्तक। यह 251 पृष्ठों की पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी 2010 छपी है। इसकी कीमत केवल 100 रुपये की यानी सभी आसानी से खरीद सकते है।
Saturday, 10 August 2019
जियो रिलायंस भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई
जियो
जियो 27 दिसंबर 2015 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के 83 वें जन्मदिन के अवसर पर लॉन्च किया गया था, जो भागीदारों और कर्मचारियों के लिए एक बीटा के साथ और 5 सितंबर 2016 को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गया। 31 मई 2019 तक, यह है भारत में सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर और 322.99 मिलियन से अधिक के साथ दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर है।
Friday, 9 August 2019
मीडिया का वर्तमान-रिज़वी अकबर
मीडिया के वर्तमान परिस्थिति को बतलाती पुस्तक
'मीडिया का वर्तमान' यह पुस्तक अकबर रिज़वी द्वारा संपादित है। यह पुस्तक 'सबलोग' पत्रिका पर आधारित है, उस पत्रिका के पाठक चाहते थे कि पत्रिका में प्रकाशित महत्वपूर्ण सामग्री को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएं। इसी को ध्यान में रखते विश्व पुस्तक मेला- 2015, नई दिल्ली से 10 युवा संपादकों को जोड़कर और उनके द्वारा लिखे लेख को शामिलकर इस पुस्तक को तैयार किया गया है। यह पुस्तक 2015 में मीडिया की भूमिका को स्पष्ट करेगा। इस पुस्तक में 14 लेख को शामिल कर लेखकों ने अपने- अपने दृष्टिकोण उस समय के मीडिया के बारे में दिया है। यह लेख निम्न प्रकार के है :-समय से संवाद,भूमंडलीकरण, पूँजी और मीडिया,आजादी के बाद पत्रकारिता, क्या यही हिंदी पत्रकारिता का 'स्वर्णयुग' है ?, समकालीन हिंदी मीडिया की चुनौतियाँ, लोकतंत्र में मीडिया के खतरे, भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतियाँ, लोकतंत्रीकरण की चुनौती, पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल, सूचना का अंत और मनोरंजन का आगमन, मीडिया: प्रतिनिधित्व का प्रश्न और अभव्यक्ति पर अंकुश, वास्तविक खतरे के आभासी औजार, भूमंडलीकरण और सम्प्रेषण का संकट ।
'आजादी के बाद पत्रकारिता: एक पर्यवेक्षण' यह लेख रामशरण जोशी द्वारा लिखी गयी है। वह इसमें 'अपराध बोध' की बात करते है जो उस समय में आपातकाल और राजनीति के लिए भी जरूरी था, पत्रकारिता के 'रोल मॉडल' के रूप नवभारत टाइम्स और दैनिक हिंदुस्तान जैसे समाचार पत्र को रॉल मॉडल के रूप में देखते है, पत्रकारिता के प्रमुख कालखंड, पत्रकारिता के नये तेवर, माथुर जोशी के दौर जैसे चीजों पर बात की है । 'भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतिया 'लेख दिलीप खान ने लिखी है। वह मीडिया की को खरीद- फरोख्त का धंदा मानते, रिलायंस का मीडिया, जागरण: कितने धंधे और, दूसरे धंधों को चमकाने का हुनर: संदर्भ दैनिक जागरण आदि जैसे मुद्दों पर बात की गई है इस लेख में। 'लोकतंत्रीकरण की चुनौती' लेख पंकज बिष्ट द्वारा लिखी गयी जिसमे लोकतंत्र को बचाने में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। 'पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल ' यह लेख दिलीप मंडल द्वारा लिखा गया है। इसमें पब्लिक रिलेशन और मीडिया के भूत काल, वर्तमान और भविष्य काल के संबंध को विस्तार से समझाया गया है। 'सूचना का अंत और मनोरंजन का आगमन' लेख सुभाष धुलिया द्वारा लिखे लेख में मीडिया का निगमीकरण, राजनीतिक, सामाजिक और संस्कृतिक जीवन का मनोरंजिकरण, लोकतांत्रिक विमर्श बनाम नियंत्रण , समाचारीय घटनाओं के बदलते मानदंड आदि जैसे मुद्दे पर विस्तार से बात की गई है। 'वास्तिविक खतरे के आभासी औजार' लेख अभिषेक त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी है। इसमें सोशल मीडिया की पृष्ठभूमि, अभिव्यक्तिबोर लोकतांत्रिकता का आभास, व्यहवाहरिक निष्कर्ष आदि जैसे पर विस्तृत बात हुई है। यह पुस्तक पत्रकारिता के छेत्र में काम करने वाले पत्रकार, रिपोर्टर को ज़रूर पढ़ना चाहिए। यह पीएचडी के शोधरतियों को पढ़ना चाहिए ताकि वह पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को समझ के आपना शोध अच्छे से लिख सके। 2015 में पत्रकारिता की दिशा को समझने के यह पुस्तक ठीक है। पुस्तक 128 पृष्ठों की अनन्य प्रकाशन से 2015 में छपी है। इसकी कीमत केवल 95 रुपये की है।
Wednesday, 7 August 2019
राष्ट्र ने बड़ी नेता खो दिया- सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज ने बीजेपी की नेता के रूप में 5 बार दिल्ली के चीफ मंत्री के रूप में कार्य किया। जब वह विदेश मंत्री थीं तो एक पाकिस्तानी लड़की को भारत में उनके इलाज के लिए वीजा चाहिए था, उन्हें तत्काल प्रभाव से वीजा दिया गया। इस तरह की प्रकृति के दिग्गज नेता थी। उन्होने हमेशा जनता के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। हमेशा एक माँ की तरह सभी का साथ दिया।
भारत में प्रेस एवं प्रेस विधि- शुक्ल नरेंद्र
भारत में प्रेस कानून को बताती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'भारत में प्रेस एवं प्रेस विधि ' यह पुस्तक नरेंद्र शुक्ल द्वारा लिखी गयी है । इस पुस्तक में प्रेस पर नियंत्रण,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे कानूनों के इतिहास को समझने के लिए यह पुस्तक बहुत कारगर है। प्रस्तुत पुस्तक में 25 अध्याय है। यह निमानुसार है :- भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारम्भिक मुद्रण, प्रतिपक्ष का उभार एवं प्रेस पर प्रथम हस्तक्षेप,भारत में प्रेस पर प्रथम नियंत्रण : पूर्व पत्रेशन अधिनियम 1799, अभव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष : प्रतिबंध और मुक्ति 1857 का प्रेस एक्ट, भारतीय दंड संहिता और प्रेस, प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट 1867, सी कस्टम एक्ट1878,वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1878,भारतीय तार अधिनियम 1885,सरकारी दस्तावेजों के प्रकटीकरण को रोकने संबंधी अधिनियम ( अधिनियम XV, 1889),अखबार व पुस्तक पंजीकरण अधिनियम1867 में संशोधन 1890, भारतीय दंड संहिता एवं प्रक्रिया संहिता में संशोधन एवं परिवर्धन 1898,पोस्ट आफिस एक्ट संशोधन 1898, इंडियन ऑफिसियल डाक्यूमेंट्स एंड इंफॉर्मेशन एक्ट 1889 का संशोधन 1903, न्यूज़ पेपर ( इंसिटमेंट टू ऑफेन्स ) एक्ट , 1908
भारतीय प्रेस एक्ट 1910, प्रथम विश्व युद्ध और प्रेस, भारतीय प्रेस अधिनियम , 1910 की समाप्ति और 1922 का अधिनियम xiv, पुलिस अधिनियम 1922,शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923,प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश 1930, भारतीय प्रेस ( विशेषधिकार ) अधिनियम 1931,द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1939
उपसंहार : आजादी और प्रेस।
अध्याय 1 ' भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारंभिक मुद्रण ' में भारत में प्रेस की स्थापना और इसे सबसे पहले ईसाई धर्म की पुस्तक के प्रकाश के बारे में विस्तार से बताया गया है । अध्याय 5 ' 1857 का प्रेस एक्ट ' में भारतीय भाषा के समाचार पत्रों पर ब्रिटिश सरकार के विरोध में छपनी वाले खबरों पर रोक लगाने वाले इस एक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है। अध्याय 7 ' प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में समाचार पत्र में संपादक का नाव, मुद्रक का नाम होना अनिवार्य करने वाला यह एक्ट पर विस्तार से बात हुई है। अध्याय 10 ' भारतीय तार अधिनियम , 1885 ' में भारतीय तार व्यवस्था जो मजबूत हो गया था उसी पर शिकंजा कसने वाले अधिनियम को ब्रिटिश सरकार लायी इस अधिनियम पर पूर्ण जानकर दी गयी है।अध्याय 13 ' भारतीय दंड संहिता एवं दंड प्रक्रिया में संशोधन एवं परिवर्धन, 1898 ' में आईपीसी के धाराओं में जो सुधार किया गया है उस पर विस्तृत चर्चा की गई है । अध्याय 18 ' प्रथम विश्व और प्रेस ' में विश्व युद्ध के दौरान प्रेस की भूमिका को बताया गया है । अध्याय 22 ' प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश , 1930 में देश में चल रहे सत्याग्रह, क्रांतिकारी गतिविधियां को बहते देख ब्रिटिश हुकूमत ने सात अध्यादेश पारित किए जिसके बारे में विस्तार से बात की गयी है। अध्याय 24 ' द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1939 ' में भारतीय जनता के सुरक्षा के लिए इस एक्ट को पारित किया , इस बारे में जाने के लिए यह अध्याय को ध्यान से पढ़े। इस पुस्तक की भाषा थिंदी कठिन है लेकिन हिंदी समझने वाले इससे पढ़ और समझ सकते है। यह पुस्तक 112 पृष्ठ की अनन्य प्रकाशन , दिल्ली से छपी पुस्तक की कीमत केवल 100 रुपये है ।
Tuesday, 6 August 2019
बिरसमुंडा (legend)
बिरसमुंडा
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था - 9 जून 1900 एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता, और लोक नायक थे जो मुंडा जनजाति के थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19 वीं सदी के अंत में आधुनिक बिहार और झारखंड के आदिवासी इलाके में पैदा हुए एक भारतीय आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना गया।
फोटोग्राफी तकनीक एवं प्रयोग- यादव सिंह नरेंद्र
फोटोग्राफी की तकनीक को बतलाती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'फोटोग्राफी तकनीक एवं प्रयोग' यह पुस्तक 'नरेंद्र सिंह यादव द्वारा लिखी गयी है। इस पुस्तक में फोटोग्राफी का विकास , कैमरा , डिजिटल फ़ोटोग्राफी , आदि से जुड़े अध्याय सम्मिलित किये गए हैं। पुस्तक में कुल 10 अध्याय है। यवः अध्याय निम्न प्रकार के है:- छायांकन,कैमरा,अंकीय छायांकन,कैमरे के मुख्य भाग एवं कार्य,कैमरा एवं अन्य उपकरणों का प्रयोग,फ़िल्टर,छायांकन की तकनीकें ,डार्करूम डार्करूम तकनीकें ,रंगीन फ़िल्म के प्रिंट ।
अध्याय 1 ' छायांकन ' में छायांकन का अर्थ, का विकास, और भारत में छायांकन पर विस्तार से बताया है। अध्याय 2 ' कैमरा ' में फ़िल्म कैमरों के वर्गीकरण - डिस्पोजल कैमरा, 110 कैमरा, टिवनलैंस कैमरा, पोलारोड कैमरा आदि जैसे अन्य प्रकार के कैमरा के बारे में बताया है।अध्याय 4 ' कैमरे के प्रमुख भाग एवं कार्य ' में कैमरा का ढांचा, लैंस, शटर, अपरचर, एक्सपोज़र,फोकल आदि को शामिल किया गया है।, अध्याय 6 ' फ़िल्टर ' में फ़िल्टर के गुणक,सिद्धान्त, फोटोग्राफी में प्रयुक्त फ़िल्टर,डिफ्रेंक्षण फ़िल्टर, आदि जैसे अन्य फ़िल्टर के बारे में बताया है। अध्याय 8 ' डार्करूम ' एनलार्जर, ट्रे, सफेलाइट, फ़िल्म प्रोसेस करना, नेगेटिव एवं पेपर आदि जैसे चीजों को शामिल किया गया है। अध्याय 10 में रंगीन डवलपर, रंगीन फ़िल्म प्रोसेसिंग, रंगीन पेपर, रंगीन फोटोग्राफी बनाने की पद्धति आदि जैसे मुददें को समझाया गया है। यह पूर्ण पुस्तक फोटोग्राफी के हर आयाम बताता है। पुस्तक में बहोत सहज एवं सरल भाषा का इस्तेमाल किया गया है।फोटोग्राफी के छेत्र में जो लोग हौ उनके लिए बहोत कार्येगर साबित होगी। यह पुस्तक 163 पृष्ठों की और 2007 के इस संस्करण को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी से छपी है।
Monday, 5 August 2019
हिंदी पत्रकारिता का स्वरूप- डॉ. प्रसाद गोविंद एवं पाण्डेय अनूप
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पुस्तक समीक्षा
हिंदी पत्रकारिता का स्वरुप’ यह पुस्तक डॉ. गोविन्द प्रसाद और अनुपम पाण्डेय द्वारा लिखी गई है. डॉ. गोविन्द डबल एम.ए, पी.एच.डी की है और वे अवध विश्वविध्यालय में वारिश रीडर के पद पर कार्यरत है और अनुपम पाण्डेय एम.ए और पि.एच.डी की है. इस पुस्तक में हिंदी पत्रकारिता और आधुनिक तकनिकी का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है. पुस्तक में कुल 10 अध्याय है. अध्याय निम्न प्रकार के है। पत्रकारिता : विविध विधाए, भारतीय पत्रकारिता का इतिहास, हिंदी पत्रकारिता का‘ विकास, हिंदी पत्रकारिता तथा मीडिया लेखन की विविध विधाएं, हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार,संपादक एवं संवादातासंवादाता के कर्त्तव्य,हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला,सहिंदी पत्रकारिता तथा साक्षात्कार कौशल,हिंदी पत्रकारिता तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट।
सबसे पहले अध्याय ‘ पत्रकारिता : विविध विधाएं ‘ में पत्रकारिता की अवधारना, भारतीय पत्रकारिता का स्वरुप,, पत्रकारिता के मानदण्ड आदि के बारे में चर्चा की गई है. अध्याय 3 ‘ हिंदी पत्रकारिता का विकास ‘ में हिंदी पत्र करीता के उद्ध्भव से लेकर अभी तक के विकास की यात्रा को बताया गया है. अध्याय 5 हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार, संपादक, एवं संवादाता ‘ में पत्रकार – अवधारणा, कार्य, दायित्व; संपादक – अवधारणा, कार्य , दायित्व ; अम्पदक- अवधारणा, रूप, गुण, आदि को विस्तार से बताया है. अध्याय 7 ‘ हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला ‘ में संपादक के कार्य, संपादक का महत्व , संपादक और संवादाता में संबंध, समाचार संपादन, समाचार स्वरुप, फीचर , आदि पर चर्चा हुई है. अध्याय 10 ‘ हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट ‘ में हिंदी पत्रकारिता को इंटरनेट से मी लाभ, संबंध, कंप्यूटर नेटवर्क, इंटरनेट का इतिहास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय पत्रकारिता के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट कर वर्त्तमान स्वरुप को स्पष्ट किया गया है. सहज सुबोध भाषा शैली तथा तार्किक विश्लेषण में लिखी यह पुस्तक सभी के लिए उपयोगी है. यह पुस्तक 287 पृष्ठों की और डिस्कवरी पब्लिकेशन हाउस , नयी दिल्ली से 2007 में छापी है.
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