Thursday, 29 August 2019

जनसंचार एवं पत्रकारिता- कुमारी शिप्रा

जनसंचार और पत्रकारिता के संबंध बतलाती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'जनसंचार एवं पत्रकारिता' यह पुस्तक कुमारी शिप्रा द्वारा लिखी गयी है। लेखिका ने एम.बी.ए तथा जनसंचार पत्रकारिता की डिग्री दिल्ली से प्राप्त की है। इस पुस्तक में जनसंचार पर विस्तृत चर्चा हुई है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय हैं। इन अध्यायों में जनसंचार का विकास, समाज, चुनौतियाँ, भारत में कम्प्यूटर तथा इंटरनेट भारतीय सिनेमा की भूमिका, समाचार संगठन एवं प्रचालन, विज्ञापन मीडिया, प्रेस कानून,नैतिकता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। यह पुस्तक जनसंचार को समझने के लिए अच्छी है लेकिन पत्रकारिता की जानकरी बहोत सीमित है। जो लोग पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में हैं उनके लिए यह पुस्तक मदतगार साबित होगी। 260 पृष्ठों की यह पुस्तक ओमेगा पिब्लिकेशन से 2008 में प्रकाशित है और इसका मूल्य 550 रुपये है।

Tuesday, 27 August 2019

जनसंचार माध्यम एवं पत्रकारिता- विजय शर्मा

पुस्तक समीक्षा 
'जनसंचार माध्यम एवं पत्रकारिता' यह पुस्तक विजय शर्मा द्वारा लिखी गयी है। शर्मा जी ने सूचना प्रौधोगिकी में एम.ए,एम.फिल किया और वर्तमान समय में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय,नोएडा में सेवा दे रहे हैं।प्रस्तुत पुस्तक में जनसंचार के विभिन्न माध्यमों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।विज्ञापन का जनसंचार में क्या महत्व है इस पर भी प्रकाश डाला गया है।जनसंपर्क आज के युग में महत्व और पत्रकारिता इसमें क्या भूमिका निभा रही है कि भी विस्तृत व्याख्या की गई है। यह इशिका पब्लिकेशन हाउस ,जयपुर से प्रकाशित पुस्तक 208 पृष्ठों की 625 रुपये की है।पुस्यक मीडिया से जुड़े व्यक्तियों व विद्यार्थियों के लिए अच्छी है।

Monday, 19 August 2019

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय का गांधी हिल

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गांधी हिल
गांधी हिल महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पहाड़ी की चोटी पर एक बगीचा है। इस बगीचे में महात्मा गांधी, तीन बंदर, बकरी आदि की प्रतिमा है। यह बगीचा शहर के नागरिकों के लिए पर्यटन स्थल की तरह है।यह स्थान विश्वविद्यालय के छात्रों के चर्चा, समूह अध्ययन, अभिव्यक्ति आदि के लिए उपयोग करते हैं।

महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा का उत्तरी परिसर

उत्तरी परिसर
यह महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय  का उत्तरी परिसर है। उत्तर परिसर में 5 छात्रावास, 1 पानी की टंकी  है।उत्तरी कैंपस में बड़े क्षेत्र को कवर किया है यह  तस्वीर में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इतनी जगह है कि छात्र क्रिकेट, फुटबॉल  आदि खेल खेल सकते हैं।

Sunday, 18 August 2019

प्रसारण तकनीकी- शर्मा विजय

प्रसारण तकनीक को बतलाती यह पुस्तक 
पुस्तक समीक्षा
'प्रसारण तकनीकी' यह पुस्तक 'विजय शर्मा' द्वारा लिखी गयी है। लेखक ने सूचना प्रौधोगिकी से एम.एस, एम.फिल किया है और वर्तमान समय में माखनलाल चतुरर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। इस पुस्तक में प्रसारण तकनीक को आधार बनाकर लिखा गया है । प्रस्तुत पुस्तक इन कुल 7 अध्याय हैं। यह अध्याय रेडियो प्रसारण तकनीक, टेलीविज़न प्रसारण तकनीकी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उपयोग होने वाले प्रसारण तकनीकी, सीधा प्रसारण , आदि जैसे मुद्दों पर आधारित है । इस पूरी पुस्तक प्रसारण तकनिक और उसके उपकरणों  पर विस्तार  से चर्चा हुई है । प्रस्तुत पुस्तक विज्ञापन से जुड़े लोग, मीडिया कर्मी, मीडिया से जुड़े विद्यार्थी,शोरधर्ती आदि जैसे लोगों के लिए बहोत उपयोगी है। यह पुस्तक इशिका पिब्लिकेशन से 2012 में प्रकाशित हुई है ।

प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने स्वतंत्र दिवस पर छात्रों प्रोत्साहित किया


प्रो.रजनीश कुमार शुक्ला
प्रो.रजनीश कुमार शुक्ला ने महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने राष्ट्र के लिए लड़े गए स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बताया। उनका मुख्य उद्देश्य छात्रों को प्रेरित करना था और उनमें आत्मविश्वास पैदा करना था क्योंकि छात्र राष्ट्र का भविष्य होते हैं।

Monday, 12 August 2019

पंडित मदन मोहन मालवीय भवन



पंडित मदन मोहन मालवीय भवन
वर्धा विश्वविद्यालय में स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय नामक दूर शिक्षा की एक इमारत है। इस भवन में हिंदी मेंसभीपाठ्यक्रम का अध्ययन किया जाता है क्योंकि पंडित मदन मोहन मालवीय एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने 1916 में शिक्षा को बढ़ावा दिया और अंतः 1916 में वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना की। इसलिए, उनके सम्मान में इस भवन का नाम रखा जा रहा है।

Sunday, 11 August 2019

विज्ञापन- महाजन अशोक

विज्ञापन की जानकारी देती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
'विज्ञापन' यह पुस्तक अशोक महाजन द्वारा लिखी गयी है। अशोक महज ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन विज्ञापन व दृश्यश्रव्य प्रचार निदेशालय में अधिकारी के  रूप में कार्य किया है। यह पुस्तक भारतीय पृष्ठभूमि में  विज्ञापन के महत्व को बता रहे है। पुस्तक में कुल 14 अध्याय है। यह अध्याय निमानुसार है :-
परिचय,परिभाषा, इतिहास, भारतीय विज्ञापनो व्यापार,मार्केटिंग, विज्ञापनों का वर्गीकरण, गवेषणा विज्ञापन , कानून और संहिताए, आलोचनाएं एवं विशेषताएं, विज्ञापन माध्यम, विज्ञापन एजेंसी, विज्ञापन बजट,विज्ञापन निर्माण,शेड्यूलिंग।
         अध्याय 1 'परिचय' में विज्ञापन शब्द की उत्पत्ति, अर्थ को विस्तार से बताया है।  अध्याय 2 'परिभाषा' में विज्ञापन की परिभाषा दी गयी है। अध्याय 3 'इतिहास'  में  विज्ञापन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताया है।  अध्याय 4 'भारतीय विज्ञापन व्यापार' विज्ञापन को व्यापार के  वृद्धि में सहाय किस प्रकार है इसपर विस्तार से बताया गया है। अध्याय 8  'विज्ञापन , कानून और संहिताएं' में विज्ञापन करते समय कुछ कानून और संहिताएं  पर प्रकाश डाला गया है।  अध्याय 10 'विज्ञापन माध्यम' में विज्ञापनों के लिए अलग - अलग माध्यमों पर विस्तार से चर्चा हुई है। अध्याय 12 'विज्ञापन बजट'  अर्थात विज्ञापन बनाने में किन चीज़ों पर कितना खर्च आएगा इसपर चर्चा की गयी है। अध्याय 13 'विज्ञापन निर्माण' में विज्ञापन निर्माण प्रक्रिया पर विस्तार से बात हुई है।
      विज्ञापन का इतिहास और व्यापार, विज्ञापनों का वर्गीकरण, विज्ञापन माध्यम, विज्ञापन बजट, विज्ञापन एजेंसी आदि विषयों पर लिखी गई यह पुस्तक  जहाँ एक ओर जनसंपर्क और विपणन के क्षेत्र में हिंदी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के आवक्षकताओं को पूरा करेगी, वही दूसरे तरफ विज्ञापन - व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए एक गाइड का काम करेगी यह पुस्तक। यह 251 पृष्ठों की पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी 2010 छपी है। इसकी कीमत केवल 100 रुपये की यानी सभी आसानी से खरीद सकते है।

Saturday, 10 August 2019

जियो रिलायंस भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई



जियो
जियो 27 दिसंबर 2015 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के 83 वें जन्मदिन के अवसर पर लॉन्च किया गया था, जो भागीदारों और कर्मचारियों के लिए एक बीटा के साथ और 5 सितंबर 2016 को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो गया। 31 मई 2019 तक, यह है भारत में सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर और 322.99 मिलियन से अधिक के साथ दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर है।

Friday, 9 August 2019

मीडिया का वर्तमान-रिज़वी अकबर

मीडिया के वर्तमान परिस्थिति को बतलाती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
'मीडिया का वर्तमान' यह पुस्तक अकबर रिज़वी द्वारा संपादित है। यह पुस्तक 'सबलोग' पत्रिका  पर आधारित है, उस पत्रिका के पाठक चाहते थे कि पत्रिका में प्रकाशित महत्वपूर्ण सामग्री को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएं। इसी को ध्यान में रखते विश्व पुस्तक मेला- 2015, नई दिल्ली से 10 युवा संपादकों को जोड़कर और उनके द्वारा लिखे  लेख को शामिलकर  इस  पुस्तक को तैयार किया गया है। यह पुस्तक 2015 में मीडिया की भूमिका को स्पष्ट करेगा। इस पुस्तक  में 14 लेख को शामिल कर लेखकों ने अपने- अपने दृष्टिकोण उस समय के मीडिया के बारे में दिया है। यह लेख निम्न प्रकार के है :-समय से संवाद,भूमंडलीकरण, पूँजी और मीडिया,आजादी के बाद पत्रकारिता, क्या यही हिंदी पत्रकारिता का 'स्वर्णयुग' है ?,  समकालीन हिंदी मीडिया की  चुनौतियाँ, लोकतंत्र में मीडिया के खतरे, भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतियाँ, लोकतंत्रीकरण की चुनौती, पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल, सूचना का अंत और मनोरंजन का आगमन, मीडिया: प्रतिनिधित्व का प्रश्न और अभव्यक्ति पर अंकुश, वास्तविक खतरे के आभासी औजार, भूमंडलीकरण और सम्प्रेषण का संकट ।
        'आजादी के बाद पत्रकारिता: एक पर्यवेक्षण' यह लेख रामशरण जोशी द्वारा लिखी गयी है। वह इसमें 'अपराध बोध'  की बात करते है जो उस समय में आपातकाल और राजनीति के लिए भी जरूरी था, पत्रकारिता के 'रोल मॉडल' के रूप नवभारत टाइम्स और दैनिक हिंदुस्तान जैसे समाचार पत्र को रॉल मॉडल के रूप में देखते है, पत्रकारिता के प्रमुख कालखंड, पत्रकारिता के नये तेवर, माथुर जोशी के दौर जैसे चीजों पर बात की है । 'भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतिया 'लेख दिलीप खान ने लिखी है। वह  मीडिया की को खरीद- फरोख्त का धंदा मानते, रिलायंस का मीडिया, जागरण: कितने धंधे और, दूसरे धंधों को चमकाने का हुनर: संदर्भ दैनिक जागरण  आदि जैसे मुद्दों पर बात की गई है इस लेख में। 'लोकतंत्रीकरण  की चुनौती' लेख पंकज बिष्ट द्वारा लिखी गयी जिसमे लोकतंत्र को बचाने में मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला  गया है। 'पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल ' यह लेख दिलीप मंडल द्वारा लिखा गया है। इसमें पब्लिक रिलेशन और मीडिया के भूत काल, वर्तमान और भविष्य काल के संबंध को विस्तार से समझाया गया है। 'सूचना का अंत और मनोरंजन का आगमन' लेख सुभाष धुलिया द्वारा लिखे लेख में  मीडिया का निगमीकरण, राजनीतिक, सामाजिक और संस्कृतिक जीवन का मनोरंजिकरण, लोकतांत्रिक विमर्श बनाम नियंत्रण , समाचारीय घटनाओं के बदलते मानदंड आदि जैसे मुद्दे पर विस्तार से बात की गई है। 'वास्तिविक खतरे के आभासी औजार' लेख अभिषेक त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी है। इसमें सोशल मीडिया की पृष्ठभूमि, अभिव्यक्तिबोर लोकतांत्रिकता का आभास, व्यहवाहरिक निष्कर्ष  आदि जैसे  पर विस्तृत बात हुई है। यह पुस्तक पत्रकारिता के छेत्र में काम करने वाले पत्रकार, रिपोर्टर को ज़रूर पढ़ना चाहिए। यह पीएचडी के शोधरतियों को पढ़ना चाहिए ताकि वह पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को समझ के आपना शोध अच्छे से लिख सके। 2015 में पत्रकारिता की दिशा को समझने के यह पुस्तक ठीक है। पुस्तक 128 पृष्ठों की अनन्य प्रकाशन  से 2015 में छपी है। इसकी कीमत केवल 95 रुपये की है। 

Wednesday, 7 August 2019

राष्ट्र ने बड़ी नेता खो दिया- सुषमा स्वराज


सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज ने बीजेपी की नेता के रूप में 5 बार दिल्ली के चीफ मंत्री के रूप में कार्य किया। जब वह विदेश मंत्री थीं तो एक पाकिस्तानी लड़की को भारत में उनके इलाज के लिए वीजा चाहिए था, उन्हें तत्काल प्रभाव से वीजा दिया गया। इस तरह की प्रकृति के दिग्गज नेता थी। उन्होने हमेशा जनता के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। हमेशा एक माँ की तरह सभी का साथ दिया।

भारत में प्रेस एवं प्रेस विधि- शुक्ल नरेंद्र

भारत में प्रेस कानून को बताती यह पुस्तक

पुस्तक समीक्षा 
'भारत में प्रेस एवं प्रेस विधि ' यह पुस्तक नरेंद्र शुक्ल द्वारा लिखी गयी है । इस पुस्तक में  प्रेस पर नियंत्रण,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे कानूनों के इतिहास को समझने के लिए यह पुस्तक बहुत कारगर है। प्रस्तुत पुस्तक में 25 अध्याय है। यह निमानुसार है :- भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारम्भिक मुद्रण, प्रतिपक्ष का उभार एवं प्रेस पर प्रथम हस्तक्षेप,भारत में प्रेस पर प्रथम नियंत्रण : पूर्व पत्रेशन अधिनियम 1799, अभव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष : प्रतिबंध और मुक्ति 1857 का प्रेस एक्ट, भारतीय दंड संहिता और प्रेस, प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट 1867, सी कस्टम एक्ट1878,वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1878,भारतीय तार अधिनियम 1885,सरकारी दस्तावेजों के प्रकटीकरण को रोकने संबंधी अधिनियम ( अधिनियम XV, 1889),अखबार व पुस्तक पंजीकरण अधिनियम1867 में संशोधन 1890, भारतीय दंड संहिता एवं प्रक्रिया संहिता में संशोधन एवं परिवर्धन 1898,पोस्ट आफिस एक्ट संशोधन 1898,  इंडियन ऑफिसियल डाक्यूमेंट्स एंड इंफॉर्मेशन एक्ट 1889 का संशोधन 1903, न्यूज़ पेपर ( इंसिटमेंट टू ऑफेन्स ) एक्ट , 1908 
भारतीय प्रेस एक्ट 1910, प्रथम विश्व युद्ध और प्रेस, भारतीय प्रेस अधिनियम , 1910 की समाप्ति और 1922 का अधिनियम xiv, पुलिस अधिनियम 1922,शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923,प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश 1930, भारतीय प्रेस ( विशेषधिकार ) अधिनियम 1931,द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1939  
उपसंहार : आजादी और प्रेस।  
    अध्याय 1 ' भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारंभिक मुद्रण ' में   भारत में प्रेस की स्थापना  और इसे सबसे पहले ईसाई धर्म की पुस्तक के प्रकाश के बारे में विस्तार से बताया गया है । अध्याय 5 ' 1857 का प्रेस एक्ट ' में भारतीय भाषा के समाचार पत्रों पर ब्रिटिश सरकार के विरोध में छपनी वाले खबरों पर रोक लगाने वाले इस एक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है। अध्याय 7 ' प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में समाचार पत्र में  संपादक का नाव, मुद्रक का नाम  होना अनिवार्य करने वाला यह एक्ट पर  विस्तार से बात हुई है।  अध्याय 10 ' भारतीय तार अधिनियम , 1885 ' में  भारतीय तार व्यवस्था जो मजबूत हो गया था उसी पर शिकंजा कसने वाले अधिनियम को ब्रिटिश सरकार लायी  इस अधिनियम पर पूर्ण जानकर दी गयी है।अध्याय 13 ' भारतीय दंड संहिता एवं दंड प्रक्रिया में संशोधन एवं परिवर्धन,  1898 ' में आईपीसी के धाराओं में जो सुधार किया गया है उस पर विस्तृत चर्चा की गई है । अध्याय 18 ' प्रथम विश्व और प्रेस ' में विश्व युद्ध के दौरान प्रेस की भूमिका को बताया गया है ।  अध्याय 22 ' प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश , 1930 में  देश में चल रहे सत्याग्रह, क्रांतिकारी गतिविधियां को बहते देख ब्रिटिश हुकूमत ने सात अध्यादेश पारित किए जिसके बारे में विस्तार से बात की गयी है। अध्याय 24 ' द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1939 ' में भारतीय जनता के सुरक्षा के लिए इस एक्ट को पारित किया , इस बारे में जाने के लिए यह अध्याय को ध्यान से पढ़े। इस पुस्तक की  भाषा थिंदी कठिन है लेकिन हिंदी समझने वाले इससे पढ़ और समझ सकते है। यह पुस्तक 112 पृष्ठ की अनन्य प्रकाशन , दिल्ली से छपी पुस्तक की कीमत केवल 100 रुपये है ।


Tuesday, 6 August 2019

बिरसमुंडा (legend)

बिरसमुंडा
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था - 9 जून 1900 एक भारतीय  स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक नेता, और लोक नायक थे जो मुंडा जनजाति के थे। उन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19 वीं सदी के अंत में आधुनिक बिहार और झारखंड के आदिवासी इलाके में पैदा हुए एक भारतीय आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना गया। 

फोटोग्राफी तकनीक एवं प्रयोग- यादव सिंह नरेंद्र

फोटोग्राफी की तकनीक को बतलाती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
'फोटोग्राफी तकनीक एवं प्रयोग' यह पुस्तक 'नरेंद्र सिंह यादव द्वारा लिखी गयी है। इस पुस्तक में फोटोग्राफी का विकास , कैमरा , डिजिटल फ़ोटोग्राफी , आदि से जुड़े अध्याय सम्मिलित किये गए हैं। पुस्तक में कुल 10  अध्याय है। यवः अध्याय निम्न प्रकार के है:- छायांकन,कैमरा,अंकीय छायांकन,कैमरे के मुख्य भाग एवं कार्य,कैमरा एवं अन्य उपकरणों का प्रयोग,फ़िल्टर,छायांकन की तकनीकें ,डार्करूम डार्करूम तकनीकें ,रंगीन फ़िल्म के प्रिंट ।
                अध्याय 1 ' छायांकन ' में छायांकन का अर्थ, का विकास, और भारत में छायांकन पर विस्तार से बताया है। अध्याय 2 ' कैमरा ' में फ़िल्म कैमरों के वर्गीकरण - डिस्पोजल कैमरा, 110 कैमरा, टिवनलैंस कैमरा,  पोलारोड कैमरा आदि जैसे अन्य प्रकार के कैमरा के बारे में बताया है।अध्याय 4 ' कैमरे के प्रमुख भाग एवं कार्य ' में कैमरा का ढांचा, लैंस, शटर, अपरचर,  एक्सपोज़र,फोकल आदि को शामिल किया गया है।, अध्याय 6 ' फ़िल्टर ' में फ़िल्टर के गुणक,सिद्धान्त, फोटोग्राफी में प्रयुक्त  फ़िल्टर,डिफ्रेंक्षण फ़िल्टर, आदि जैसे अन्य फ़िल्टर के बारे में बताया है। अध्याय 8 ' डार्करूम ' एनलार्जर,  ट्रे,  सफेलाइट, फ़िल्म प्रोसेस करना, नेगेटिव एवं पेपर  आदि जैसे चीजों को शामिल किया गया है। अध्याय 10 में रंगीन डवलपर, रंगीन फ़िल्म प्रोसेसिंग, रंगीन पेपर, रंगीन  फोटोग्राफी बनाने की पद्धति आदि जैसे मुददें को समझाया गया है। यह पूर्ण पुस्तक फोटोग्राफी के हर आयाम बताता है। पुस्तक में बहोत सहज एवं सरल भाषा का इस्तेमाल किया गया है।फोटोग्राफी के छेत्र में जो लोग हौ उनके लिए बहोत कार्येगर साबित होगी। यह पुस्तक 163 पृष्ठों की और 2007 के इस संस्करण को राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी से छपी है। 

Monday, 5 August 2019

हिंदी पत्रकारिता का स्वरूप- डॉ. प्रसाद गोविंद एवं पाण्डेय अनूप

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पुस्तक समीक्षा 
हिंदी पत्रकारिता का स्वरुप यह पुस्तक डॉ. गोविन्द प्रसाद और अनुपम पाण्डेय द्वारा लिखी गई है.  डॉ. गोविन्द डबल एम.ए, पी.एच.डी की है और वे अवध विश्वविध्यालय में वारिश रीडर के पद पर कार्यरत है और अनुपम पाण्डेय एम.ए और पि.एच.डी की है. इस पुस्तक में  हिंदी पत्रकारिता और आधुनिक तकनिकी का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है.  पुस्तक में कुल 10 अध्याय है. अध्याय निम्न प्रकार के है।  पत्रकारिता : विविध विधाए,  भारतीय पत्रकारिता का इतिहास, हिंदी पत्रकारिता का‘ विकास,  हिंदी पत्रकारिता तथा मीडिया लेखन की विविध विधाएं, हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार,संपादक एवं संवादातासंवादाता के कर्त्तव्य,हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला,सहिंदी पत्रकारिता तथा साक्षात्कार कौशल,हिंदी पत्रकारिता तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट।
सबसे पहले अध्याय ‘ पत्रकारिता : विविध विधाएं ‘ में पत्रकारिता की अवधारना, भारतीय पत्रकारिता का स्वरुप,, पत्रकारिता के मानदण्ड आदि के बारे में चर्चा की गई है. अध्याय 3 ‘ हिंदी पत्रकारिता का विकास ‘ में हिंदी पत्र करीता के उद्ध्भव से लेकर अभी तक के विकास की यात्रा को बताया गया है. अध्याय 5 हिंदी पत्रकारिता : पत्रकार, संपादक, एवं संवादाता ‘ में पत्रकार – अवधारणा, कार्य, दायित्व; संपादक – अवधारणा, कार्य , दायित्व  ; अम्पदक- अवधारणा, रूप, गुण, आदि को विस्तार से बताया है. अध्याय 7 ‘ हिंदी पत्रकारिता तथा संपादन कला ‘ में संपादक के कार्य, संपादक का महत्व , संपादक और संवादाता में संबंध, समाचार संपादन, समाचार स्वरुप, फीचर , आदि पर चर्चा हुई है.  अध्याय 10 ‘ हिंदी पत्रकारिता एवं इंटरनेट ‘ में हिंदी पत्रकारिता को इंटरनेट से मी लाभ, संबंध, कंप्यूटर नेटवर्क, इंटरनेट का इतिहास जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय पत्रकारिता  के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को स्पष्ट कर वर्त्तमान स्वरुप को स्पष्ट किया गया है. सहज सुबोध भाषा शैली तथा तार्किक विश्लेषण में लिखी यह पुस्तक सभी के लिए उपयोगी है. यह पुस्तक 287 पृष्ठों की और डिस्कवरी पब्लिकेशन हाउस , नयी दिल्ली से 2007 में छापी है.

Sunday, 4 August 2019

एक सोलर लाइट

सोलर लाइट
एक सौर प्रकाश एक एलईडी लैंप, सौर पैनल, बैटरी, चार्ज नियंत्रक से बना एक प्रकाश व्यवस्था है। यह बैटरी से बिजली का संचालन करता है, सौर पैनल के उपयोग के माध्यम से चार्ज किया जाता है। सॉलर लाइट में मिट्टी के दीपक की तुलना में कम परिचालन लागत होती है क्योंकि ईंधन के विपरीत, सूरज से अक्षय ऊर्जा मुक्त होती है। सौर प्रकाश मौसम पर निर्भर है।

Saturday, 3 August 2019

कौन हैं डॉ. रामविलास शर्मा


डॉ.रामविलस शर्मा
डॉ. रामविलास शर्मा का जन्म 10 अक्टूबर 1912 को हुआ था। उन्होंने आलोचकों, कविता, साहित्य आदि को लिखना पसंद किया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए और पी.एच.डी किया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में अपना करियर शुरू किया और बाद में निर्देशक के.एम संस्थान, आगरा बने। वे हिंदी साहित्य सम्मेलन के एक सत्र में प्रस्तुत सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' पर अपने विद्वतापूर्ण पत्र के साथ 1939 में आलोचक के रूप में सुर्खियों में आए। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं भारतीय साहित्य की भौमिका, निराला की साहित्य साधना (3 खंड), प्रेमचंद और अंकल युगचार्य, रामचंद्र शुक्ल और हिंदी के साहित्यकार, भारतेन्दु हरिश्चंद्र और हिंदी के नवजागरण के समसामयिकी आदि।

पत्रकारिता हेतु लेखन- डॉ. सिंह निशांत

पत्रकारिता में लेखन शैली बताती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
'पत्रकारिता हेतु लेखन' यह पुस्तक डॉ. निशांत सिंह द्वारा लिखी गयी है। इस पुस्तक में लेखक ने विभिन्न विधाओं के सभी अवयव जैसे कलात्मक, रचनशीलता, कल्पनाशीलता आदि पर चर्चा की गई है। पुस्तक में कुल 8 अध्याय है । अध्याय 1 'किसे कहते समाचार' में समाचार की पैभाषा, अर्थ ,समाचार के प्रकार  आदि पर आधारित है। अध्याय 2 में 'रिपोर्टिंग कैसे करते हैं' में रिपोर्टिंग,,रिपोर्टिंग के कर्त्तव्य एवं उत्तरदायित्व, रिपोर्टर के प्रकार जैसे मुद्दे पर बात की गयीं। अध्याय 3 तीन में 'साक्षात्कार बारीकियां' में साक्षात्कार का अर्थ, कैसे लिया जाता है,  साक्षात्कर्ता के गुण, साक्षात्कार करने की प्रक्रिया पर विस्तृत बात हुई है। अध्याय 4 'रेडियो बनाम पत्रकारिता' में पत्रकारिता समाचार पत्र, न्यूज़ चैनल और रेडियो पत्रकारिता में अंतरसंबंध को बताया गया है। इसमें रेडियो के विविध रूप,समाचार,विशेषता को बताता है। अध्याय 5 में 'फीचर लेखन'  में फीचर परिभाषा, फीचर के प्रकार ,फीचर  की संरचना आदि पर बात हुई ।अध्याय 7 में 'खोजी  पत्रकारिता'  यह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बढ़ रहे प्रचलन का श्रेय 'तहलका' पोर्टल को दिया गया ऐसा बताया जा रहा है इस अध्याय में । खोजी पत्रकारिता का इतिहास,गुण,दायित्व,आदि जैसे मद्दे पर है। सबसे आखरी अध्याय ' व्यंग्य लेखन'  में व्यंग्य कैसे किया जाए, व्यंग्य का महत्व वर्तमान समय में, आदि पर बताया गया है। यह पूर्ण पुस्तक विविध पत्रकारिता में लेखन शैली पर बात करता है। यह पुस्तक 300 रुपये की है। 200  पृष्ठों की यह पुस्तक अर्चना पब्लिकेशन से छपी है।

Thursday, 1 August 2019

हिंदी पत्रकारिता का इतिहास- सिंह मीनाक्षी

पत्रकारीता के इतिहास को बतलाती पुस्तक
पुस्तक समीक्षा 
'हिंदी पत्रकारिता का इतिहास' इस पुस्तक की मीनाक्षी सिंह लेखिका है। यह पुस्तक भारत में पत्रकारिता की शुरुआत से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तक कि पत्रकारिता के बारे में बताया गया है। इस पुस्तक में कुल 13 अध्याय है । पहले अध्याय जो भारतीय पत्रकारिता का विकास नाम से है। इसमें भारत के पहले समाचार पत्र, विभिन्न काल के संपादक , प्रेस की भूमिका  सन 1878,उद्देश्य, आदि जैसे मुद्दों पर बताया गया है। हिंदी पत्रकारिता के विभिन्न चरण नाम से दूसरे अध्याय में हिंदी का पहला समाचार पत्र, प्रमुख पत्रकार  पर आधारित है। अध्याय 4 में आजादी के पहले समाचार पत्रों के उद्देश्य पर आधारित है।इस पुस्तक में सबसे प्रमुख अध्याय 5 जिसमें आजादी के दौरान पत्रकारिता की भूमिका बताई गई है। अध्याय 6 और 7 में हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियां और हिंदी पत्रकारिता के बदलते स्वरूप की बात की गई है। अध्याय 10 में टेलीविजन ने पत्रकारिता को जो नई दिशा दी यह बताया है। इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी जैसे इंटरनेट  का इस्तेमाल से पत्रकारिता ने विकास के तरफ एक कदम बढ़ाया। अध्याय 12 में पत्रकारों व प्रेस के लिए संगठन, अधिनियम,सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बात हुई है।इस पुस्तक में पूर्ण रूप पत्रकारिता से जुड़े हर पहलू पर बात की गई है। इस पुस्तक में बेहद सरल व सुगम भाषा इस्तमाल किया है। पत्रकारिता के इतिहास को जाने के लिए यह पुस्तक बहुत अच्छी है। ओमेगा पब्लिकेशन से 2009 में छपी यह पुस्तक की कीमत 600 रुपये है ।

मित्रता एक उपहार

मित्रता
सच्ची दोस्ती में शामिल होना हर किसी के लिए बहुत कठिन होता है। यह जीवन का एक दिव्य और सबसे कीमती उपहार है। सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ और जीवन की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में गिना जाता है। मैं भगवान को धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने मुझे दोस्त दिए। वे हमेशा मेरे अच्छे दिनों या बुरे दिनों में मेरे साथ होते हैं। 

वर्धा रेलवे स्टेशन की नई इमारत

नई इमारत यह वर्धा शहर के रेलवे स्टेशन की नई इमारत है। इसे बनने में 2 साल का समय लगा है। इस इमारत में 8 काउंटर हैं जिसमे 4 आरक्षित काउंट...