भारत में प्रेस कानून को बताती यह पुस्तक
पुस्तक समीक्षा
'भारत में प्रेस एवं प्रेस विधि ' यह पुस्तक नरेंद्र शुक्ल द्वारा लिखी गयी है । इस पुस्तक में प्रेस पर नियंत्रण,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे कानूनों के इतिहास को समझने के लिए यह पुस्तक बहुत कारगर है। प्रस्तुत पुस्तक में 25 अध्याय है। यह निमानुसार है :- भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारम्भिक मुद्रण, प्रतिपक्ष का उभार एवं प्रेस पर प्रथम हस्तक्षेप,भारत में प्रेस पर प्रथम नियंत्रण : पूर्व पत्रेशन अधिनियम 1799, अभव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष : प्रतिबंध और मुक्ति 1857 का प्रेस एक्ट, भारतीय दंड संहिता और प्रेस, प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट 1867, सी कस्टम एक्ट1878,वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1878,भारतीय तार अधिनियम 1885,सरकारी दस्तावेजों के प्रकटीकरण को रोकने संबंधी अधिनियम ( अधिनियम XV, 1889),अखबार व पुस्तक पंजीकरण अधिनियम1867 में संशोधन 1890, भारतीय दंड संहिता एवं प्रक्रिया संहिता में संशोधन एवं परिवर्धन 1898,पोस्ट आफिस एक्ट संशोधन 1898, इंडियन ऑफिसियल डाक्यूमेंट्स एंड इंफॉर्मेशन एक्ट 1889 का संशोधन 1903, न्यूज़ पेपर ( इंसिटमेंट टू ऑफेन्स ) एक्ट , 1908
भारतीय प्रेस एक्ट 1910, प्रथम विश्व युद्ध और प्रेस, भारतीय प्रेस अधिनियम , 1910 की समाप्ति और 1922 का अधिनियम xiv, पुलिस अधिनियम 1922,शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923,प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश 1930, भारतीय प्रेस ( विशेषधिकार ) अधिनियम 1931,द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1939
उपसंहार : आजादी और प्रेस।
अध्याय 1 ' भारत में प्रेस की स्थापना एवं प्रारंभिक मुद्रण ' में भारत में प्रेस की स्थापना और इसे सबसे पहले ईसाई धर्म की पुस्तक के प्रकाश के बारे में विस्तार से बताया गया है । अध्याय 5 ' 1857 का प्रेस एक्ट ' में भारतीय भाषा के समाचार पत्रों पर ब्रिटिश सरकार के विरोध में छपनी वाले खबरों पर रोक लगाने वाले इस एक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है। अध्याय 7 ' प्रेस एंड रेजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867 में समाचार पत्र में संपादक का नाव, मुद्रक का नाम होना अनिवार्य करने वाला यह एक्ट पर विस्तार से बात हुई है। अध्याय 10 ' भारतीय तार अधिनियम , 1885 ' में भारतीय तार व्यवस्था जो मजबूत हो गया था उसी पर शिकंजा कसने वाले अधिनियम को ब्रिटिश सरकार लायी इस अधिनियम पर पूर्ण जानकर दी गयी है।अध्याय 13 ' भारतीय दंड संहिता एवं दंड प्रक्रिया में संशोधन एवं परिवर्धन, 1898 ' में आईपीसी के धाराओं में जो सुधार किया गया है उस पर विस्तृत चर्चा की गई है । अध्याय 18 ' प्रथम विश्व और प्रेस ' में विश्व युद्ध के दौरान प्रेस की भूमिका को बताया गया है । अध्याय 22 ' प्रेस पर नियंत्रण हेतु अध्यादेश , 1930 में देश में चल रहे सत्याग्रह, क्रांतिकारी गतिविधियां को बहते देख ब्रिटिश हुकूमत ने सात अध्यादेश पारित किए जिसके बारे में विस्तार से बात की गयी है। अध्याय 24 ' द डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1939 ' में भारतीय जनता के सुरक्षा के लिए इस एक्ट को पारित किया , इस बारे में जाने के लिए यह अध्याय को ध्यान से पढ़े। इस पुस्तक की भाषा थिंदी कठिन है लेकिन हिंदी समझने वाले इससे पढ़ और समझ सकते है। यह पुस्तक 112 पृष्ठ की अनन्य प्रकाशन , दिल्ली से छपी पुस्तक की कीमत केवल 100 रुपये है ।

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