संपादक का महत्व बताती यह पुस्तक
प्रस्तुत पुस्तक 'पत्रकारिता में संपादक का महत्व' ज्ञानेश प्रकाश अवस्थी द्वारा लिखी गई है। वह कहते है कि " संपादक किसी भी पत्र की आत्मा को प्रदर्शित करता है"। इसका यह अर्थ है कि संपादक के बिना कोई भी समाचार का कोई अस्तित्व नहीं है। इस पुस्तक में कुल 15 अध्याय हैं। सबसे पहले अध्याय में ही लेखक पत्रकारिता से हमे परिचित कराता है, समाचार और संपादक के बीच संबंध को बताता है। समाचार का सज्जा तैयार आवश्यक बिन्दुयों को हमारे समक्ष अध्याय दो में रखता है। अध्याय चार में लेखक संपादक का महत्व बताते हैं और कहते है कि "संपादक का स्थान समाचार पत्र में श्रेष्ठ होता है"। वह अध्याय छे में योगल किष्पर शुक्ल, हरिश्चजन्द्र भारतेंदु जौसे प्रमुख पत्रकारों के बारे में विस्तार से बताते हैं। अध्याय आठ से दस तक संपादक से उपसंपादक के कार्य, विशेषता आदि जैसे बिंदू पर लिखा गया है। इस पुस्तकके अध्याय 11 में वह विभिन्न समाचार समितियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आखरी अध्याय में पत्रकार के कठिनायों और समस्या को बताते हुए इसस पुस्तक को समाप्त करते हैं। यह पुस्तक संपादक के महत्व को समझने के लिए बहोत अच्छी है।भाषा सरल है। लेख शैली ठीक - ठाक है। यह पुस्तक 255 पृष्ठों की है, इसकी कीमत 550 रूपये है। पुस्तक ओमेगा पब्लिकेशन, नई दिल्ली से छपी है। 2010 का संस्करण है।

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