Thursday, 14 September 2017

नज़र कहीं और निशाना कहीं

आज शाम मैं अपने कुछ मित्रों के साथ एक बगीचे में बैठा था। आपस में बात कर रहे और अच्छे वातावरण का लुफ्त उठा रहे थे जब जाने का समय आया तो भी बातो में व्यस्त चलते चलते बगीचे के बाहर अपने चपल पहने के लिए निकल गए।लेकिन वो कहते हैं कि नज़र कही  और  शरीर कही का एक बहुत अच्छा उदाहरण देखने के लिए आज मिला हैं।

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